रायपुर। करवा चौथ के पावन पर्व के अवसर पर राष्ट्रीय क्षत्रिय करणी सेना के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों और सभी सनातनियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने विशेष रूप से करवा चौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन माताओं और बहनों के सुखी वैवाहिक जीवन, पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि की कामना की।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने करवा चौथ पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व मानव जीवन में प्रेम, समर्पण, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है। उन्होंने ‘नर ही नारायण है’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में मानव में ही ईश्वर का स्वरूप देखा जाता है।
नवरात्रि और करवा चौथ का उदाहरण
तोमर ने कहा कि सनातन परंपराओं में स्त्री और पुरुष दोनों के सम्मान को विशेष स्थान दिया गया है। नवरात्रि में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है, वहीं करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
उन्होंने पुरुषों से भी अपील की कि वे महिलाओं के मान-सम्मान, सुरक्षा और गरिमा का हर हाल में ध्यान रखें। उनके मुताबिक, परिवार और समाज की मजबूती आपसी सम्मान, विश्वास और प्रेम से ही संभव है।
करवा चौथ की कथा का किया उल्लेख
वीरेंद्र सिंह तोमर ने करवा चौथ से जुड़ी पारंपरिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व त्याग, प्रेम और पति-पत्नी के बीच समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। साहूकार की पत्नी, उसकी बहुओं और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था।
व्रत के दौरान भाइयों ने अपनी बहन को भोजन करने के लिए कहा, लेकिन उसने बताया कि वह चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलेगी। बहन की परेशानी देखकर छोटे भाई ने पेड़ के पीछे दीपक जलाकर ऐसा भ्रम पैदा किया कि चतुर्थी का चंद्रमा निकल आया है। बहन ने उसे चंद्रमा समझकर अर्घ्य दे दिया और व्रत खोल लिया।
मान्यता के अनुसार, व्रत विधि से पहले टूटने के कारण उसके पति पर संकट आ गया। इसके बाद उसने अपने पति के जीवन की कामना करते हुए पूरे समर्पण के साथ व्रत और तप किया। अगले वर्ष करवा चौथ पर सुहागिनों से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद उसके पति को पुनर्जीवन मिलने की कथा प्रचलित है।
आस्था और पारिवारिक मूल्यों का पर्व
करवा चौथ की यह कथा आज भी कई स्थानों पर महिलाओं द्वारा व्रत के दौरान पढ़ी और सुनी जाती है। इस अवसर पर महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ऐसे पर्व भारतीय संस्कृति की आस्था, पारिवारिक एकता, प्रेम और समर्पण की परंपरा को मजबूत करते हैं। उन्होंने करवा चौथ के अवसर पर सभी सुहागिन महिलाओं और प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हुए पर्व की हार्दिक बधाई दी।

