बेंगलुरु (कर्नाटक):
बेंगलुरु को वैश्विक मानकों के अनुरूप एक विश्वस्तरीय और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित शहर बनाने के उद्देश्य से कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार बेंगलुरु को “अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और सुगम” बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शहरभर में चल रहे व्यापक ‘फुटपाथ अतिक्रमण हटाओ अभियान और ‘सुरक्षित फुटपाथ अभियान’ का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम जनता के व्यापक हित में बेहद ‘कड़ा लेकिन जरूरी’ है।
3 साल में 900 से अधिक पैदल यात्रियों की मौत पर जताई चिंता
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस अभियान की आवश्यकता पर कड़े आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा:
“भारत और पूरी दुनिया आज बेंगलुरु की तरफ देख रही है। इसकी बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को देखते हुए हमें यहां के नागरिक बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाना ही होगा। पिछले तीन वर्षों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और अव्यवस्था के कारण 900 से अधिक पैदल यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। यह एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
अब तक का सबसे बड़ा एक्शन: 400 किलोमीटर से ज्यादा फुटपाथ मुक्त
मुख्यमंत्री ने इस विशेष अभियान के तहत अब तक हुई बड़ी कार्रवाई का ब्योरा साझा किया:
- अतिक्रमण पर प्रहार: पिछले 9 दिनों के भीतर बेंगलुरु के पांच नगर निगम क्षेत्रों में 400 किलोमीटर से अधिक फुटपाथों को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराया गया है।
- हजारों अवैध निर्माण ध्वस्त: इस अभियान के तहत लगभग 50,000 अवैध कब्जों को हटाया गया है, जिनमें फुटपाथों पर बनीं अवैध दुकानें, पक्के रैंप और अन्य अनाधिकृत ढांचे शामिल हैं।
- पॉलिसी में बदलाव: फुटपाथों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक नई सख्त ‘फुटपाथ नीति’ भी ला रही है, जिसके तहत अवैध फ्लेक्स बैनर और होर्डिंग्स लगाने वालों पर 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
गरीब रेहड़ी-पटरी वालों के लिए पुनर्वास का भरोसा
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य किसी गरीब का रोजगार छीनना नहीं है, बल्कि व्यवस्था को सुचारू बनाना है। उन्होंने प्रभावित वेंडर्स के लिए राहत उपायों की घोषणा की:
- वेंडिंग जोन का निर्धारण: मुख्य सड़कों से ठेले और दुकानें हटाई जाएंगी, लेकिन उन्हें व्यापार करने के लिए वैकल्पिक साइड रोड और विशिष्ट ‘वेंडिंग जोन’ आवंटित किए जाएंगे।
- स्थायी निर्माण पर रोक: रेहड़ी-पटरी वाले दिन में अपना व्यापार कर शाम को घर जा सकेंगे, लेकिन फुटपाथों पर स्थायी तंबू या शेड लगाने की अनुमति किसी को नहीं होगी।
- सरकारी सहायता: प्रभावित गरीब वेंडर्स की पहचान कर उन्हें बकायदा पहचान पत्र फूड कार्ड और आवश्यक नागरिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन: सीएम शिवकुमार ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर की जा रही है। उन्होंने इस साहसिक कदम के लिए बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा की भी जमकर तारीफ की और कहा कि पूरी सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
इस अभियान को आम नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों और मीडिया का भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि बेंगलुरु को देश का एक मॉडल शहर बनाने के लिए कड़े फैसले लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

