विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश):
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के युवाओं, इंजीनियरों, उद्यमियों और इनोवेटर्स से राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व योगदान देने की एक बेहद प्रेरणादायक अपील की है। विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक और स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत ‘आईएनएस महेंद्रगिरी’ (INS Mahendragiri) के जलावतरण (Commissioning) समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि आज के युवाओं को सिर्फ अपना करियर ही नहीं, बल्कि ‘नए भारत’ का भविष्य गढ़ने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
रक्षा क्षेत्र में ‘गोल्डन एरा’: युवाओं के लिए बड़ा संदेश
रक्षा मंत्री ने विशेष रूप से देश की युवा प्रतिभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का डिफेंस इकोसिस्टम आज पहले से कहीं अधिक खुला, सुलभ और सक्षम हो चुका है।
“मैं देश के युवाओं से विशेष रूप से कहना चाहता हूं—यदि आप एक इंजीनियर, इनोवेटर, उद्यमी (Entrepreneur), रिसर्चर या निवेशक हैं, तो आपके लिए आज से बेहतर अवसर और समय कभी नहीं रहा। आइए, हम सब मिलकर न केवल अपना भविष्य बनाएं, बल्कि भारत का भविष्य संवारें। आइए, ऐसे जहाजों का निर्माण करें जो हमारे समुद्रों की रक्षा करें। ऐसी तकनीकें विकसित करें जो भविष्य के युद्धों की दिशा तय करें, और ऐसे सिस्टम तैयार करें जो भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएं।”
आंध्र प्रदेश का ‘कुर्नूल’ बनेगा देश का नया “ड्रोन हब”
भाषण के दौरान राजनाथ सिंह ने देश के औद्योगिक नक्शे को लेकर एक बेहद शानदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के कुर्नूल क्षेत्र की तुलना देश के सबसे बड़े औद्योगिक शहरों से की:
- सूरत: जैसे अपनी हीरा तराशी के लिए ‘डायमंड सिटी’ के रूप में विश्व विख्यात है।
- बेंगलुरु: जिसे देश की ‘सिलिकॉन वैली’ और आईटी का मक्का कहा जाता है।
- कुर्नूल: रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि कुर्नूल में 8 ड्रोन कंपनियों द्वारा मिलकर बनाई जा रही ‘ड्रोन सिटी’ के कारण आने वाले समय में इस क्षेत्र को पूरे देश के ‘ड्रोन हब’ (Drone Hub) के रूप में एक विशिष्ट पहचान मिलेगी।
युद्धपोत निर्माण: सिर्फ सेना की ताकत नहीं, अर्थव्यवस्था का पावरहाउस
रक्षा मंत्री ने समझाया कि एक नए युद्धपोत का निर्माण केवल नौसेना में एक जहाज को शामिल करना भर नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी अर्थव्यवस्था को गति देने वाला चक्र (Economic Driver) है:
- विशाल इकोसिस्टम का विकास: जहाज निर्माण से स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस्ड सेंसर्स, प्रोपल्शन सिस्टम, सॉफ्टवेयर, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे दर्जनों उद्योगों को सीधा बढ़ावा मिलता है।
- रोजगार के लाखों अवसर: इस पूरी प्रक्रिया से देश के लाखों युवाओं के लिए रोजगार और नौकरियों के नए रास्ते खुलते हैं।
- आर्थिक मजबूती: जब हम स्वदेशी जहाज बनाते हैं, तो हम केवल अपनी नौसेना को मजबूत नहीं कर रहे होते, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहे होते हैं।
मैरीटाइम इंडिया विजन 2030′ और सरकारी नीतियां
भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग और समुद्री रक्षा नवाचार (Maritime Defence Innovation) का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए सरकार ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख कदम उठाए गए हैं:
इन नीतियों का मुख्य लक्ष्य है:
- भारतीय बंदरगाहों (Ports) का आधुनिकीकरण करना।
- अंतर्देशीय जलमार्गों (Inland Waterways) का विस्तार करना।
- देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहद कुशल और तेज बनाना।
- डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज, प्राइवेट सेक्टर, MSMEs, स्टार्टअप्स और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर एक वर्ल्ड-क्लास मैरीटाइम इकोसिस्टम तैयार करना।
“हर नया जहाज, भविष्य में एक दीर्घकालिक निवेश”
समारोह के अंत में भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत की तारीफ करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हर नए स्वदेशी जहाज के साथ हमारा रक्षा इकोसिस्टम अधिक परिपक्व,
अधिक कुशल और अधिक आत्मविश्वासी हो रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर जहाज निर्माण और समुद्री रक्षा तकनीकों के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों के बीच अपनी एक अलग और बेहद मजबूत पहचान बनाएगा।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

