नई दिल्ली / वॉशिंगटन:
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा भारत से आयात होने वाले सामानों पर 12.5% अतिरिक्त सीमा शुल्क (अतिरिक्त टैरिफ) लगाने का एक नया प्रस्ताव पेश किया गया है, जिस पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और स्पष्ट विरोध दर्ज कराया है।
अमेरिका ने भारत पर ‘जबरन मजदूरी’ के जरिए चावल और कुछ अन्य उत्पाद तैयार कराने का गंभीर आरोप लगाया है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद, तथ्यहीन और बिना किसी सबूत का बताया है।
उद्योग जगत और वाणिज्य विभाग ने दी चेतावनी
इस मामले पर भारत के वाणिज्य विभाग के साथ-साथ देश के शीर्ष उद्योग संगठनों जैसे FICCI और CII ने भी मोर्चा खोल दिया है। भारतीय पक्ष की ओर से अमेरिका को साफ चेतावनी दी गई है
कि इस तरह के किसी भी एकतरफा और जल्दबाजी में लिए गए फैसले का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ेगा। इससे न केवल भारतीय निर्यातकों (Exporters) को भारी नुकसान होगा, बल्कि अमेरिकी बाजारों में चीजें महंगी होने से वहां के आम उपभोक्ताओं पर भी भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
भारत ने की फैसले पर पुनर्विचार की अपील
भारतीय राजनयिकों और वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिकी प्रशासन से इस विवादित प्रस्ताव पर तुरंत दोबारा विचार करने की अपील की है। भारत का रुख साफ है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए आगे बढ़ा है, ऐसे में बिना किसी ठोस आधार के इतने बड़े प्रतिबंधात्मक कदम उठाना सही नहीं है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

