नई दिल्ली:
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने पर अपनी सहमति जता दी है। इस फैसले से कई आंदोलनरत छात्रों को बड़ी कानूनी राहत मिलेगी।
केस वापसी की प्रक्रिया कैसे होगी पूरी?
मुकदमे वापस लेने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा:
- उपराज्यपाल (LG) की मंजूरी: दिल्ली पुलिस सबसे पहले उपराज्यपाल को पत्र भेजकर केस वापस लेने (Withdrawal of Cases) की औपचारिक अनुमति मांगेगी।
- अदालत की मुहर: एलजी से मंजूरी मिलने के बाद पुलिस संबंधित अदालत में आवेदन दाखिल करेगी, जिसके बाद कोर्ट की अंतिम मुहर से मुकदमों को आधिकारिक रूप से वापस लिया जाएगा।
केस रद्दीकरण के अन्य कानूनी विकल्प
इसके अलावा, मुकदमों को समाप्त करने के लिए अन्य कानूनी रास्तों का भी सहारा लिया जा सकता है:
- क्लोजर रिपोर्ट (Closure Report): जिन मामलों में अभी तक पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, उनमें पुलिस क्लोजर रिपोर्ट जमा कर सकती है।
- हाईकोर्ट से FIR रद्द कराना: BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 528 के तहत सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआईआर रद्द कराई जा सकती है।
- लोक अदालत (Lok Adalat): छोटे-मोटे और कम गंभीर मामलों को लोक अदालत के माध्यम से भी निपटाया जा सकता है।
गंभीर अपराध वाले मामलों में नहीं मिलेगी राहत
सरकार और प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि राहत केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों को ही दी जाएगी। जिन मामलों में पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट या हिंसा हुई है, उन्हें इस केस वापसी के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा। ऐसे गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

