नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की नेता और पूर्व जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) अध्यक्ष आइशे घोष को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। यह मामला वर्ष 2021 में दिल्ली के बंगा भवन (Bangla Bhavan) के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।
अदालत ने यह राहत उस समय दी जब आइशे घोष की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि पिछली सुनवाई में उनकी अनुपस्थिति अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण थी। इसके बाद अदालत ने गैर-जमानती वारंट के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2021 में बंगा भवन के बाहर आयोजित एक प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में आइशे घोष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं, जिनमें धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) और धारा 447 (आपराधिक अतिक्रमण) शामिल हैं, के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
गिरफ्तारी को लेकर हुआ था विवाद
इस घटनाक्रम से एक दिन पहले CPI(M) ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस ने आइशे घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी मुख्यालय AKG भवन में प्रवेश करने की कोशिश की। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए विरोध जताया था। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना था कि वह केवल अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट का पालन कर रही थी और कार्रवाई नियमित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा थी।
अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
अदालत द्वारा फिलहाल वारंट पर रोक लगाए जाने के बाद आइशे घोष को तत्काल राहत मिली है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लेगी।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

