नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार के एक बड़े फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कच्ची चीनी के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी शून्य किए जाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी ने सरकार की आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तब केंद्र सरकार आयात का रास्ता अपना रही है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता के बीच बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी के आयात को शून्य इंपोर्ट ड्यूटी पर मंजूरी दी है। यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो महीनों में भारत में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी की मांग और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार ने सप्लाई बढ़ाने का फैसला किया है।
केजरीवाल ने साधा निशाना
इस फैसले पर अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार को घेरा है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सरकार को पहले घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और किसानों व उपभोक्ताओं के हितों पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी ने सरकार के आयात संबंधी फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, इस मामले में एक अहम बात यह है कि सरकार के फैसले को चीन से चीनी आयात बढ़ाने के फैसले के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा। आधिकारिक आदेश के मुताबिक शून्य ड्यूटी की सुविधा TRQ के तहत कच्ची चीनी के सीमित आयात के लिए है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि भारत में आने वाली चीनी का बड़ा हिस्सा ब्राजील जैसे देशों से आने की संभावना है।
कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में जारी तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। वहीं, चीनी उद्योग से जुड़े कुछ संगठनों ने देश में पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही है और सरकार के फैसले पर अलग राय रखी है।
फिलहाल, चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र के इस फैसले ने एक तरफ बाजार में सप्लाई बढ़ाने की उम्मीद जगाई है, तो दूसरी तरफ विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका भी दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले हफ्तों में शून्य ड्यूटी पर चीनी आयात का घरेलू कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

