रायपुर/नवा रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के विरोध प्रदर्शन के बीच अब क्षत्रिय करणी सेना भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आई है। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए सरकार से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग की है।
प्रशासन ने मंगलवार को सुरक्षा व्यवस्था के बीच नकटी गांव में कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और बुलडोजर की मदद से कई मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके घर बिना पर्याप्त पुनर्वास व्यवस्था किए तोड़ दिए गए, जिससे कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे थे और उन्हें बिजली, पानी, सड़क जैसी सरकारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई थीं। ऐसे में अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित कर बेदखल करना उनके साथ अन्याय है।
इसी बीच करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनके समर्थन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना के लिए गरीबों को बिना सम्मानजनक पुनर्वास के बेघर करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले वैकल्पिक आवास, मूलभूत सुविधाएं और उचित मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए थी, उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
तोमर ने कहा कि बारिश के मौसम में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को बेघर करना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रभावित परिवारों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो करणी सेना उनके समर्थन में आंदोलन को और तेज करेगी।
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कार्रवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। मौके पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच अभियान पूरा किया और इसे सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई बताया।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित लोगों के अधिकारों और पुनर्वास को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
फिलहाल नकटी गांव का यह विवाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रभावित परिवार पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, जबकि सरकार और प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

