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जैसी करनी, वैसी भरनी’: पंजाब और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अंदरूनी संकट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का तंज

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नई दिल्ली। पंजाब और मध्य प्रदेश कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह के बीच केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी आज जिन परिस्थितियों से गुजर रही है, वह उसके अपने राजनीतिक फैसलों और वर्षों की कार्यशैली का नतीजा है। कांग्रेस में लगातार सामने आ रहे असंतोष, वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और गुटबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंधिया ने कहा, “जैसी करनी, वैसी भरनी।” उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अब अपने ही फैसलों के परिणाम भुगत रही है।

सिंधिया ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से नेतृत्व संकट, आपसी खींचतान और संगठनात्मक कमजोरी से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने समय-समय पर अपने समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की, जिसका असर अब खुले तौर पर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, जिन नेताओं ने वर्षों तक संगठन के लिए काम किया, उन्हें उचित सम्मान और जिम्मेदारी नहीं मिली, जिसके कारण पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता गया।

उन्होंने कहा कि पंजाब और मध्य प्रदेश में जिस तरह वरिष्ठ नेताओं और संगठन के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं, वह किसी एक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही आंतरिक राजनीति का असर है। सिंधिया ने कहा कि जब किसी राजनीतिक दल में संवाद की कमी हो जाती है और निर्णय कुछ लोगों तक सीमित रह जाते हैं, तो संगठन कमजोर होना स्वाभाविक है।

केंद्रीय मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा संगठन आधारित राजनीति में विश्वास करती है, जहां कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जाता है और उनकी मेहनत को महत्व मिलता है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा विकास, सुशासन और जनसेवा के एजेंडे पर काम कर रही है, जबकि कांग्रेस अपने आंतरिक विवादों से बाहर निकलने में ही संघर्ष कर रही है।

सिंधिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सब कुछ देख रही है और राजनीतिक दलों का मूल्यांकन उनके काम और संगठनात्मक क्षमता के आधार पर करती है। उन्होंने कहा कि जनता अब स्थिर नेतृत्व, पारदर्शी शासन और विकास की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में यदि कोई दल अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास कायम नहीं रख पाता, तो उसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी दिखाई देता है।

उन्होंने कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी संगठनात्मक एकजुटता होती है। यदि पार्टी के भीतर लगातार असंतोष, बयानबाजी और गुटबाजी बनी रहती है, तो उसका नुकसान अंततः पार्टी को ही उठाना पड़ता है।

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