वाशिंगटन/तेल अवीव: मध्य पूर्व की राजनीति में नए घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय कूटनीति को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से लेबनान से जुड़े मामलों में अधिक जिम्मेदारी और सावधानी बरतने का आग्रह किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव हालिया कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने संकेत दिया कि सभी पक्षों को ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो शांति प्रक्रिया को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से लेबनान में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई और संयम की आवश्यकता पर जोर दिया।
लेबनान लंबे समय से इज़राइल और Hezbollah के बीच तनाव का केंद्र रहा है। हाल के महीनों में सीमा क्षेत्रों में कई बार सैन्य गतिविधियां और संघर्ष देखने को मिले हैं, जिसके कारण व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका बनी हुई है। अमेरिका की चिंता यह है कि किसी भी बड़े सैन्य टकराव से पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है और हालिया कूटनीतिक प्रगति प्रभावित हो सकती है।
उधर, इज़राइल ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा बनी रहेगी और वह अपने सुरक्षा हितों से समझौता नहीं करेगा। हालांकि, इज़राइली नेतृत्व अमेरिका के साथ संवाद बनाए रखने की बात भी कह रहा है। दूसरी ओर, विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की हालिया टिप्पणियां क्षेत्रीय संघर्षों को सीमित रखने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की अमेरिकी नीति का संकेत हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लेबनान सीमा पर हालात किस दिशा में बढ़ते हैं और अमेरिका, इज़राइल तथा ईरान के बीच विकसित हो रहे नए समीकरण क्षेत्रीय राजनीति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। फिलहाल, मध्य पूर्व में शांति और सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।