वाशिंगटन/तेहरान, 16 जुलाई 2026:
मध्य पूर्व (West Asia) में युद्ध का खतरा एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो गई है। दोनों देशों की ओर से बेहद कड़े तेवर और सीधी धमकियां सामने आ रही हैं।
ईरान की सीधी चेतावनी: “होर्मुज हमारी रेड लाइन है”
ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है। ईरान का कहना है:
- रेड लाइन घोषित: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपनी “रेड लाइन” घोषित कर दिया है और कहा है कि दुनिया की कोई भी ताकत उनसे इसका नियंत्रण नहीं छीन सकती।
- बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी: ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना ने उनके ठिकानों या बुनियादी ढांचे पर कोई भी हमला किया, तो वे पलटवार करते हुए पूरे क्षेत्र (खाड़ी देशों) के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा ठिकानों को मटियामेट कर देंगे।
- “सबके लिए या किसी के लिए नहीं”: ईरानी सेना (IRGC) का कहना है कि क्षेत्र से तेल और ऊर्जा का निर्यात या तो सभी देशों के लिए सुरक्षित रहेगा या फिर वे इसे किसी के लिए भी नहीं होने देंगे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के भीषण हवाई हमले
इस बीच, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और आक्रामक कर दिया है:
- लगातार पांचवें दिन हमले: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार पांचवें दिन भी भीषण हवाई हमले जारी रखे हैं।
- महत्वपूर्ण ठिकानों पर बमबारी: अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने होर्मुज जलमार्ग के बेहद रणनीतिक ‘ग्रेटर टुनब द्वीप’ (Greater Tunb Island) सहित बंदर अब्बास, चाबहार और अहवाज जैसे तटीय इलाकों में ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों पर भारी बमबारी की है।
- हमले का कारण: U.S. Central Command ने कहा है कि ये हमले उन ईरानी सैन्य संपत्तियों को नष्ट करने के लिए किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल संकट का मंडराता खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस के कुल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता है।
- समुद्री नाकेबंदी: अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) लागू करने और ईरान द्वारा इस जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने की घोषणा के बाद से दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से आसमान छूने लगी हैं।
- पूरे क्षेत्र में तनाव: ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों और ड्रोनों के कारण बहरीन और कुवैत जैसे अमेरिकी सहयोगी खाड़ी देशों में भी हवाई हमले के सायरन बज रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में एक पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

