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जंतर-मंतर पर इजाजत मिले न मिले, दिल्ली जाएंगे उमर अब्दुल्ला; राज्य के दर्जे की मांग को लेकर संसद के घेराव की तैयारी

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श्रीनगर/नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026:

जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के बीच सियासी तकरार चरम पर पहुंच गई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के बावजूद, वे और उनकी पार्टी के विधायक अपने तय कार्यक्रम के अनुसार 19 जुलाई को दिल्ली रवाना होंगे।

संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई को दिल्ली में एक बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के छीने गए अधिकारों और विशेष पहचान की बहाली के मुद्दे पर उनका रुख बिल्कुल अडिग है और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

संसद के मॉनसून सत्र में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

नेशनल कॉन्फ्रेंस इस प्रदर्शन के जरिए देश की संसद और राष्ट्रीय पटल पर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाए जाने के बाद से सूबे के विकास और लोकतांत्रिक अधिकारों को ठेस पहुंची है।

  • उमर अब्दुल्ला का कड़ा रुख:
  • “प्रशासन चाहे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दे या न दे, हम 19 जुलाई को दिल्ली जरूर जाएंगे। 20 जुलाई को संसद के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की जाएगी। यह हमारे आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।”

आमने-सामने होंगे कश्मीरी पंडित और नेशनल कॉन्फ्रेंस

20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर एक अनोखा और बड़ा राजनीतिक विरोधाभास देखने को मिलेगा। एक तरफ जहां उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा वापस मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने भी उसी दिन दिल्ली में बड़े प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है।

  • कश्मीरी पंडितों की शर्त: विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठनों का कहना है कि वे जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी मांग है कि सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने से पहले घाटी में कश्मीरी पंडितों के सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास (Rehabilitation) की पुख्ता व्यवस्था करे।
  • सुरक्षा और गारंटी की मांग: कश्मीरी पंडितों के नेताओं के मुताबिक, बिना पुनर्वास के राज्य का दर्जा दिए जाने से घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी हो सकती है।

दिल्ली पुलिस और प्रशासन की बढ़ी चिंता

एक ही दिन (20 जुलाई) को संसद के ठीक बाहर और लुटियंस दिल्ली में दो विरोधी मांगों को लेकर होने वाले इन प्रदर्शनों ने दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना और दोनों गुटों के बीच किसी भी संभावित टकराव को रोकना सुरक्षाबलों के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होने वाला है।

मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

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