रायपुर। बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपने ही बुने जाल में फंस गए हैं। भगवान राम को ‘सीधा’ और भगवान कृष्ण को ‘टेढ़ा’ बताने वाले बयान पर देशभर में FIR और विरोध के बीच, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सबसे बड़ी फटकार लगी है।
राम मिलेंगे आश्रम, रायपुर के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश चतुर्वेदी (भैया जी) ने बागेश्वर बाबा को शास्त्रों की भाषा में ऐसा आइना दिखाया है कि सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट 1.5K से ज्यादा शेयर हो चुकी है।
डॉ. हरिवंश कोई आम सोशल मीडिया यूजर नहीं हैं। वे स्वयं जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य हैं – ठीक उन्हीं गुरुदेव के, जिनका नाम बागेश्वर बाबा भी लेते हैं। इसलिए उनका वार सीधा गुरु-मर्यादा पर है।
क्या लिखा है डॉ. हरिवंश ने?
उनकी पोस्ट की 5 बड़ी बातें जो बागेश्वर बाबा की पोल खोलती हैं:
बांसुरी को बजनिया मत समझो बाबा!
बाबा ने कहा था – बांसुरी बजाना तो कोई भी बजा लेगा। डॉ. हरिवंश ने जवाब दिया – “अपने बांसुरी वादक से कहो हजारों की भीड़ में बांसुरी बजाए, पर वो सिर्फ मुझे सुनाई दे और बाकी को नहीं। श्री कृष्ण की बांसुरी में यह सामर्थ्य था। जिसके लिए बजाते थे, वही सुनता था। बांसुरी के छिद्र ब्रह्मांड के प्रतीक हैं।”
गोपियों से अपनी तुलना मत करो
बाबा ने सफाई में कहा था कि गोपियां भी तो कृष्ण को कपटी कहती थीं। इस पर डॉ. हरिवंश आग बबूला हो गए – “अजब गजब आदमी हो भाई! तुम गोपिकाओं के नाखून के बराबर नहीं, उनके पैरों की एक रज के बराबर भी नहीं। उस प्रेम की अनुभूति इस जन्म में तुम्हें हो ही नहीं सकती।”
पर्ची निकालना बंद करो, शास्त्र पढ़ो
उन्होंने बागेश्वर बाबा को तीन किताबें पढ़ने की सलाह दी, जो उनके ही गुरु ने लिखी हैं:
राष्ट्र नायक कृष्ण
तुलसी साहित्य में श्री कृष्ण
कान्हा और हनुमान की तुलना
और कहा – “सीधे चित्रकूट पहुंचो, गुरुदेव की शरण में अध्ययन शुरू करो।”
साल में दो-तीन बार माफी मांगने से अच्छा है कथा बंद कर दो
यह सबसे तीखा तंज था। डॉ. हरिवंश ने लिखा – “यदि ऐसा नहीं कर सकते और साल में दो-तीन बार क्षमा मांगनी ही है, तो बेहतर है कथा बंद करिए और सिर्फ पर्ची निकालने का काम बढ़िया से करते जाइए।”
शास्त्रार्थ की खुली चुनौती
“मैं भी उन्हीं गुरुदेव की कृपा से जी रहा हूं। आओ, एक-एक घंटे का सेशन कर लेते हैं। पहले आप बोलो राम-कृष्ण में अंतर, फिर मैं बोलूंगा बिना आपकी एक बात दोहराए। जनता फैसला करेगी।”
वायरल फॉर्मूला: विवाद – माफी – सहानुभूति
रायपुर के संत समाज में चर्चा है कि यह कोई भूल नहीं, बल्कि बागेश्वर धाम को सुर्खियों में बनाए रखने का पुराना पैटर्न है।
NDTV से लेकर TV9 तक की रिपोर्ट्स बताती हैं, यह पहला मौका नहीं है। साईं बाबा पर टिप्पणी, अली-बजरंगबली वाला बयान, और अब राम-कृष्ण में भेद। हर बार पैटर्न एक ही है – करैरा जैसी छोटी जगह से एक क्लिप निकालना, उसे वायरल होने देना, पूरे देश में विरोध झेलना, और फिर एक हाथ जोड़कर माफी वीडियो जारी कर देना – “हमारा उद्देश्य भेद करना नहीं था, हम तो कृष्ण भक्त हैं।”
इससे होता क्या है? विरोधी भी वीडियो शेयर करते हैं, समर्थक भी। यूट्यूब, फेसबुक की एल्गोरिदम को विवाद पसंद है। नाम ट्रेंडिंग में आ जाता है और अगली कथा की बुकिंग फुल।
लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ गया है। क्योंकि विरोध किसी राजनेता ने नहीं, बल्कि तुलसी पीठ से जुड़े एक विद्वान संत ने किया है, जो शास्त्र के आधार पर बात कर रहे हैं। पप्पू यादव जैसे नेता तो FIR तक पहुंच गए हैं, पर डॉ. हरिवंश का प्रहार आस्था पर है, जो ज्यादा गहरा है।
आखिर में डॉ. हरिवंश ने जो अंतिम सलाह दी है, वही इस पूरे विवाद का सार है
“पर्ची बांटो, भूत-प्रेत में उलझाए रहो, धूल झोंकते रहो, अंधविश्वास बढ़ाते रहो। कहा कथा के चक्कर में पड़े हो? यदि कथा करनी ही है तो जाओ जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी के आंगन में, तुलसी पीठ चित्रकूट में।”

