विज्ञान डेस्क: ब्रह्मांड जितना खूबसूरत और रहस्यमयी दिखाई देता है, उतना ही यह इंसानों के लिए जानलेवा भी है। कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर कोई इंसान बिना स्पेससूट (Spacesuit) के अंतरिक्ष के खुले वैक्यूम (Vacuum) में चला जाए, तो वह कितनी देर तक जीवित रह सकता है? विज्ञान के अनुसार, इसका जवाब बेहद चौंकाने वाला है।
महज 15 सेकंड में खो जाएगी चेतना
अंतरिक्ष में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति और वायुमंडलीय दबाव न होने के कारण इंसान का शरीर केवल 15 सेकंड के भीतर अपनी सुध-बुध (Consciousness) खो देगा। पृथ्वी पर जब हम सांस लेते हैं, तो वायुमंडल का दबाव फेफड़ों में ऑक्सीजन बनाए रखता है। लेकिन अंतरिक्ष के वैक्यूम में जाते ही शरीर के फेफड़ों में मौजूद बची हुई ऑक्सीजन भी बाहर की तरफ खिंच जाती है, जिससे दिमाग तक ऑक्सीजन पहुँचना बंद हो जाता है और इंसान बेहोश हो जाता है।
शरीर के साथ क्या-क्या होगा?
अगर बिना सुरक्षा उपकरणों के अंतरिक्ष में चले गए, तो शरीर में कई भयानक बदलाव देखने को मिलेंगे:
- खून और शारीरिक तरल पदार्थ उबलने लगेंगे: वायुमंडलीय दबाव शून्य होने के कारण शरीर के रक्त और अन्य तरल पदार्थों का क्वथनांक (Boiling Point) कम हो जाता है, जिससे वे उबलने की स्थिति में आ जाते हैं (इसे Ebullism कहा जाता है)।
- शरीर फूल जाएगा: दबाव न होने के कारण शरीर में मौजूद गैसे और जलवाष्प फैलने लगेंगे, जिससे शरीर का आकार दोगुना तक फूल सकता है, हालांकि इंसान का शरीर फटेगा नहीं क्योंकि त्वचा काफी लचीली होती है।
- अत्यधिक तापमान की मार: अंतरिक्ष में जहाँ सूरज की रोशनी पड़ती है वहाँ तापमान बेहद गर्म (120°C से अधिक) और छांव वाले इलाकों में बेहद ठंडा (-150°C से कम) होता है, जो शरीर को तुरंत जमा या झुलसा सकता है।
मौत में कितना वक्त लगेगा?
हालांकि इंसान 15 सेकंड के भीतर बेहोश हो जाता है, लेकिन मस्तिष्क की कोशिकाओं (Brain Cells) के पूरी तरह नष्ट होने और मौत होने में लगभग 1 से 2 मिनट का समय लगता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष यात्री जिस विशेष स्पेससूट को पहनते हैं, वह उन्हें ऑक्सीजन, सही दबाव और जानलेवा रेडिएशन (Radiation) से बचाकर जीवित रखता है। बिना इस कवच के अंतरिक्ष इंसान के लिए पल भर में जानलेवा साबित हो सकता है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

