नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से ने एक बार फिर इस क्षेत्र को सुर्खियों में ला दिया है। महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक दखल से परेशान लोग लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। कई रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और दमन की भी बात कही गई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत बिना किसी सैन्य कार्रवाई के भविष्य में PoK पर अपना नियंत्रण स्थापित कर सकता है? भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है कि PoK भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे का समाधान भारत की संवैधानिक और कूटनीतिक नीति के अनुरूप होना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अलग-अलग मौकों पर यह कह चुके हैं कि उन्हें विश्वास है कि समय आने पर PoK के लोग स्वयं भारत के साथ जुड़ने की इच्छा व्यक्त कर सकते हैं। हालांकि, यह एक राजनीतिक दृष्टिकोण है और इसकी सफलता कई घरेलू, क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
बिना सैन्य कार्रवाई के भारत के लिए 5 संभावित विकल्प
- कूटनीतिक दबाव बढ़ाना
- भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा सकता है, जिससे पाकिस्तान पर वैश्विक दबाव बढ़े। PoK की जनता के प्रति विश्वास बढ़ाना
- जम्मू-कश्मीर में विकास, निवेश और बेहतर प्रशासन का मॉडल पेश कर भारत PoK के लोगों के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाने की कोशिश कर सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय जनमत तैयार करना
- भारत विभिन्न देशों और वैश्विक संस्थाओं के सामने PoK की वास्तविक स्थिति और वहां के लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से रख सकता है।
- राजनीतिक और संवैधानिक रुख बनाए रखना
- भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि PoK उसका अभिन्न हिस्सा है। संसद में पारित प्रस्ताव और सरकारी नीति इसी रुख को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में PoK के भीतर असंतोष और राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो वहां की जनता की इच्छा और क्षेत्रीय हालात किसी नए समाधान का आधार बन सकते हैं। हालांकि, यह केवल एक संभावित परिदृश्य है और इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
फिलहाल भारत की नीति सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक, राजनीतिक और संवैधानिक माध्यमों पर केंद्रित दिखाई देती है। PoK को लेकर भविष्य में क्या स्थिति बनेगी, यह क्षेत्रीय राजनीति, पाकिस्तान के आंतरिक हालात और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

