रायपुर। अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रीय क्षत्रिय करणी सेना ने गहरा शोक व्यक्त किया है। करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने नाना पाटेकर को राष्ट्रभक्त और अनुशासित सिपाही बताते हुए उनके देश के प्रति समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि नाना जैसे सैनिक कभी मरा नहीं करते, वे लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहते हैं।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर द्वारा भारतीय सेना के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिनेता होने के बावजूद नाना पाटेकर का सेना से गहरा जुड़ाव रहा। वह एक बेहतरीन शूटर भी थे और उन्होंने अपने फिल्मी करियर से ब्रेक लेकर युद्ध के मोर्चे पर सैनिकों के साथ रहने की इच्छा जताई थी।
बताया जाता है कि 90 के दशक की शुरुआत में फिल्म ‘प्रहार’ की स्क्रिप्ट पर काम करते समय नाना पाटेकर ने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ करीब तीन साल तक प्रशिक्षण लिया था। कारगिल युद्ध शुरू होने के बाद उन्होंने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर मोर्चे पर जाने की इच्छा जताई थी। इसके लिए उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस से अनुमति लेने की आवश्यकता बताई गई।
नाना पाटेकर ने जॉर्ज फर्नांडीस से संपर्क किया और अपनी सैन्य ट्रेनिंग का हवाला देते हुए मोर्चे पर जाने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद अगस्त 1999 में उन्होंने नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम क्षेत्र में दो सप्ताह से अधिक समय बिताया। इस दौरान उन्होंने सैनिकों के साथ समय बिताया और बेस अस्पताल में भी कुछ दिनों तक सेवा की। नाना ने अपने कारगिल अनुभव के दौरान क्विक रिस्पॉन्स टीम यानी QRT का हिस्सा होने की बात भी कही थी।
वीरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि नाना पाटेकर का जीवन केवल अभिनय तक सीमित नहीं था, बल्कि देश और सेना के प्रति उनका समर्पण भी प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि नाना जैसे लोग कल भी दिलों में जिंदा थे, आज भी हैं और आने वाले समय में भी लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।

