रायपुर/कोरिया।
कोरिया जिले के बहुचर्चित ट्रिपल मर्डर मामले में न्याय की मांग को लेकर चल रहा संघर्ष अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह (सी) विभाग ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी कर इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने के लिए राज्य में अधिकार क्षेत्र प्रदान करने की सहमति दे दी है। इसे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- न्याय आंदोलन के बाद बड़ा फैसला
कोरिया ट्रिपल मर्डर कांड को लेकर शुरुआत से ही क्षत्रिय करणी सेना छत्तीसगढ़ ने पीड़ित परिवारों के समर्थन में आवाज बुलंद की। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में लगातार ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, न्याय यात्रा और जनजागरण अभियान चलाए गए। आंदोलन के दौरान प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
हाल ही में करणी सेना के सैकड़ों कार्यकर्ता रायपुर से कोरिया पहुंचे थे, जहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
- सरकार ने दी CBI जांच की सहमति

- “यह न्याय की पहली बड़ी जीत” – वीरेंद्र सिंह तोमर
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि समाज के न्याय और कानून पर विश्वास की लड़ाई है।
राज्य सरकार द्वारा CBI जांच को मंजूरी दिए जाने के बाद करणी सेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। संगठन का कहना है कि अब मामले की निष्पक्ष जांच होगी और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी।
संगठन ने इस फैसले के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजसिंह शेखावत सहित आंदोलन से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं, समाज के लोगों और पीड़ित परिवारों के संघर्ष को भी महत्वपूर्ण बताया।
- अब सबकी नजर CBI जांच पर
CBI जांच शुरू होने के बाद अब पीड़ित परिवारों और पूरे प्रदेश की निगाहें जांच एजेंसी पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच के जरिए मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

