सौगत रॉय ने कहा कि “ऋतब्रत पहले CPM में थे। वह लगातार टीएमसी के बारे में बयान देते रहते हैं, लेकिन उनकी बातों का कोई वजन नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति के तहत पार्टी कार्यालयों पर कब्जा करने और कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने का काम कर रही है।
उन्होंने हाल ही में कोलकाता स्थित टीएमसी कार्यालय में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों ने कार्यालय पर ताला लगा दिया था। जब वह वहां पहुंचे और ताला हटाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। रॉय का आरोप है कि प्रशासन का रवैया निष्पक्ष नहीं था और इससे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका मजबूत होती है।
टीएमसी सांसद ने दावा किया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि राज्य के कई हिस्सों में पार्टी कार्यालयों पर कब्जा करने और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति चिंताजनक है, लेकिन उनकी पार्टी इस लड़ाई से पीछे हटने वाली नहीं है। “यह लंबी लड़ाई है और हम इसे पूरी ताकत से लड़ेंगे। हमारे पास संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं है,” उन्होंने कहा।
इस बीच, पार्टी के भीतर जारी विवाद और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच टीएमसी नेतृत्व पर भी दबाव बढ़ गया है। पार्टी ने कार्यालय पर कथित कब्जे की घटना को अवैध बताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

