कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अपराध जांच विभाग (CID) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यालय से जुड़े करीब 25 लोगों को गैरकानूनी तरीके से समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने और डराने-धमकाने की साजिश करार दिया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जिन लोगों को समन भेजे गए, उनमें उनके कार्यालय से जुड़े कर्मचारी, सहयोगी और अन्य लोग शामिल हैं। उनके मुताबिक, इन लोगों पर दबाव बनाया गया ताकि वे उनके खिलाफ झूठे बयान दें। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से किया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है।
टीएमसी सांसद ने यह भी दावा किया कि उनके और उनके सहयोगियों के फोन टैप किए गए। इतना ही नहीं, उनके परिवार के सदस्यों को भी कथित तौर पर धमकियां दी गईं और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यक्तिगत अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके करीबी लोगों से पूछताछ के दौरान उन पर दबाव डाला गया कि वे उनके खिलाफ मनगढ़ंत और झूठे बयान दें। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके सहयोगियों ने किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और सच का साथ दिया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी जांच या दबाव बनाया जाए, वह डरने वाले नहीं हैं और जनता के हितों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
टीएमसी सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रताड़ना से घबराने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सत्य और लोकतंत्र की रक्षा के लिए वह हर कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से शांत रहने और कानून पर भरोसा बनाए रखने की अपील की।
फिलहाल, अभिषेक बनर्जी के इन आरोपों पर पश्चिम बंगाल पुलिस, STF या CID की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन सकता है।

