हैदराबाद, 15 जून: तेलंगाना में बुनियादी ढांचा विकास को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने हैदराबाद मेट्रो फेज-2 परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक बाधाएं खड़ी कर परियोजना की प्रगति को प्रभावित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, 122 किलोमीटर लंबे हैदराबाद मेट्रो फेज-2 विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए जुटाई गई वित्तीय सहायता को राज्य तक पहुंचने से रोका जा रहा है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है।
- बढ़ी लागत और बदली रणनीति
रेवंत रेड्डी ने कहा कि मेट्रो विस्तार की योजना पहले शुरू की गई थी, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुई देरी के कारण इसकी लागत में भारी वृद्धि हुई। जो परियोजना पहले लगभग ₹15,000 करोड़ में पूरी होने का अनुमान था, उसकी लागत बढ़कर करीब ₹22,000 करोड़ तक पहुंच गई।
उन्होंने बताया कि मूल भागीदार कंपनी Larsen & Toubro ने फेज-2 में शामिल होने से वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए पीछे हटने का फैसला किया। इसके बाद राज्य सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मेट्रो परिसंपत्तियों के अधिग्रहण का निर्णय लिया।
- जापानी वित्तीय सहायता पर उठा विवाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए एक जापानी वित्तीय संस्था से कम ब्याज दर पर बड़ा ऋण स्वीकृत कराया गया है, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ कम हो सकता है। उनका आरोप है कि स्वीकृत धनराशि की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद राशि राज्य सरकार तक नहीं पहुंच पा रही है।
उन्होंने दावा किया कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं, जिनमें Reserve Bank of India की प्रक्रियाएं भी शामिल हैं, पूरी की जा चुकी हैं।
- केंद्रीय मंत्री पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री और सिकंदराबाद सांसद G. Kishan Reddy पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे परियोजना को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हैदराबाद जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए मेट्रो विस्तार बेहद जरूरी है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
- केंद्र से मांगा स्पष्ट जवाब
रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह यह स्पष्ट करे कि हैदराबाद मेट्रो फेज-2 परियोजना में भागीदार बनेगी या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार परियोजना में शामिल नहीं होना चाहती, तो आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करे ताकि राज्य सरकार अपने दम पर परियोजना को आगे बढ़ा सके।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार मेट्रो विस्तार को हर हाल में पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर पूरे प्रोजेक्ट का वित्तीय भार स्वयं उठाने को भी तैयार है।