नई दिल्ली:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधारों और युवाओं के मुद्दों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देश के जाने-माने शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो चुका है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद और अभिनेता मनोज तिवारी के एक वायरल बयान ने इस मामले में घी का काम किया है। मनोज तिवारी द्वारा वांगचुक के अनशन को ‘पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा’ बताए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
मनोज तिवारी ने क्या कहा? (विवादित बयान)
एक न्यूज़ एजेंसी से बातचीत के दौरान जब मनोज तिवारी से सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और गिरती सेहत को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा:
“सोनम वांगचुक या जो भी हैं… यह सब आम आदमी पार्टी (AAP) का ही एक एक्सटेंशन हैं। जब यह लोग हर तरफ से जनता द्वारा हरा दिए जाते हैं, तो कभी किसी और मुद्दे के जरिए तो कभी वांगचुक के नाम पर देश की गति (विकास दर) को धीमा करने का प्रयास करते हैं।”
मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन के पीछे देश की तरक्की को रोकने और सरकार को बदनाम करने की एक राजनीतिक साजिश काम कर रही है।
सोशल मीडिया पर क्यों भड़क गए लोग?
मनोज तिवारी का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (X, फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर नेटिजन्स और एक्टिविस्ट्स ने बीजेपी सांसद की जमकर आलोचना शुरू कर दी।
- संवेदनशीलता की कमी का आरोप: लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र के अधिकारों और देश के बच्चों के भविष्य (शिक्षा सुधारों) के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन पर बैठा है, उसके लिए “सोनम वांगचुक या जो भी है” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
- सेहत पर उठ रहे सवाल: भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक का वजन काफी गिर चुका है और डॉक्टरों ने उनके मल्टी-ऑर्गन डैमेज की चेतावनी दी है। ऐसे गंभीर समय पर उनकी बीमारी या अनशन को राजनीतिक नौटंकी बताना लोगों को रास नहीं आ रहा है।
- सेलेब्रिटीज और विपक्षी नेताओं का मिला समर्थन: सोनम वांगचुक के इस आंदोलन को डिंपल यादव, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं और बॉलीवुड की दिग्गज हस्तियों (नसीरुद्दीन शाह, शबाना आज़मी, जीनत अमान, कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर) का पुरजोर समर्थन मिल रहा है।
क्या हैं आंदोलनकारी सोनम वांगचुक की मांगें?
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- शिक्षा और प्रशासनिक सुधार: देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली (जैसे नीट पेपर लीक विवाद) में कड़े सुधार और पारदर्शिता।
- जवाबदेही तय करना: पेपर लीक और छात्रों के साथ खिलवाड़ के मामलों में शिक्षा मंत्रालय की सीधी जिम्मेदारी व जवाबदेही तय हो।
- लद्दाख के अधिकार: इससे पहले वे लद्दाख को छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर भी लंबा आंदोलन चला चुके हैं।
मनोज तिवारी के इस बयान ने इस सामाजिक आंदोलन को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया है। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे विपक्ष द्वारा प्रायोजित ‘प्रोपेगैंडा’ बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश के युवा और आम नागरिक इसे कश्मीरी और लद्दाखी आवाम के अधिकारों के साथ-साथ देश के छात्रों के हक की लड़ाई मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गरमाने के पूरे आसार हैं।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

