नई दिल्ली। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।
प्रह्लाद जोशी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार पर भर्ती प्रक्रिया में पद के दुरुपयोग और भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) के गंभीर आरोप लगे हैं। उनका कहना है कि आयोग के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने उस भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से भाग लिया, जिसमें उनकी बेटियां भी उम्मीदवार थीं। जोशी ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि KPSC सचिव द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। उनका कहना है कि इन आरोपों ने राज्य की प्रमुख भर्ती एजेंसी की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी अंतिम चयन दस्तावेजों पर भी आयोग अध्यक्ष ने हस्ताक्षर किए, जबकि उनके परिवार के सदस्य उसी भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह लाखों सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा और भर्ती प्रणाली में जनता का भरोसा कमजोर पड़ेगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे मामले की समयबद्ध, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे और योग्य उम्मीदवारों के हितों की रक्षा हो सके। साथ ही राज्यपाल से भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
फिलहाल KPSC भर्ती विवाद कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है, जबकि अब सबकी नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार जांच की मांग पर क्या फैसला लेती है।

