नई दिल्ली। दिल्ली में शनिवार को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर राजधानी में जनजीवन और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह ठप नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से मेट्रो स्टेशनों और सड़कों पर लागू प्रतिबंधों की समीक्षा करने को कहा है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था के साथ आम लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखा जा सके।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों से उन मेट्रो स्टेशनों की संख्या कम करने पर विचार करने को कहा, जिन्हें बंद रखने का प्रस्ताव है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सड़कों पर लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा की जाए और यह आकलन किया जाए कि किन इलाकों में पाबंदियां जरूरी हैं तथा कहां लोगों की आवाजाही को सामान्य रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई माकपा (CPM) के महासचिव एमए बेबी की ओर से दाखिल याचिका पर हुई। याचिका में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ राहत मांगी गई थी। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर सार्वजनिक परिवहन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने से आम नागरिकों को परेशानी हो रही है।
अदालत ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग रोजाना कामकाज के लिए मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहते हैं। गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली से आने-जाने वाले यात्रियों को मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हर व्यक्ति के पास निजी कार या अन्य वाहन उपलब्ध नहीं होता, इसलिए परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाते समय आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि वह इस मामले में सरकार से परामर्श करेंगे। उन्होंने मेट्रो और रेलवे स्टेशनों से संबंधित प्रतिबंधों पर उचित कदम उठाने का भरोसा दिया। उन्होंने जुलाई में हुए पिछले CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकती हैं, लेकिन प्रतिबंध ऐसे होने चाहिए, जिनसे आम लोगों की आवाजाही पर अनावश्यक असर न पड़े। अदालत ने सड़कों को बंद करने और यातायात नियंत्रित करने के फैसलों पर भी दोबारा विचार करने की जरूरत बताई।
अब सरकार और संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा की जरूरतों तथा सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने पर विचार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ दिल्ली के आम नागरिकों की दैनिक आवाजाही और सुविधाएं भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

