नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान (चंदे) में कथित हेराफेरी और गबन का मामला अब एक बड़े राष्ट्रव्यापी राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इस बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के महासचिव और वरिष्ठ नेता एमए बेबी ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि मामले में शामिल रसूखदार लोगों को बचाने के लिए जांच को दबाया या सीमित किया जा सकता है।
“रंगे हाथों पकड़े गए हैं भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोग”
समाचार एजेंसी ‘एएनआई’ (ANI) से बातचीत करते हुए एमए बेबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने नारे पर तंज कसा। उन्होंने कहा:
उन्होंने आगे उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देखना अभी बाकी है कि क्या राज्य सरकार इस मामले में निष्पक्ष न्याय करेगी या राजनीतिक संरक्षण को प्राथमिकता देगी। उन्होंने जनता और विपक्ष से इस मामले पर कड़ी ‘सतर्कता’ (Vigilance) बनाए रखने की अपील की है।
विवाद की मुख्य बातें और अब तक की कार्रवाई
यह विवाद शुक्रवार को तब और गहरा गया जब इस घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दो शीर्ष ट्रस्टियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
- ट्रस्टियों का इस्तीफा: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है।
- 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में: 25 जून को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज हुई एफआईआर के बाद, अयोध्या की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों और मंदिर के स्टाफ सहित 8 आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
- लाखों की रिकवरी: अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा के अनुसार, आरोपियों के पास से अब तक 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है। आरोपियों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारी और मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी शामिल हैं, जिन पर सुनियोजित चोरी और आपराधिक साजिश का आरोप है।
विपक्ष का चौतरफा हमला
एमए बेबी के अलावा विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार आक्रामक हैं:
- अरविंद केजरीवाल (AAP): आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या का दौरा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले और चंदा चोरी करने वाले दोषियों को ‘कठोरतम’ सजा दिलाई जाए।
- प्रियंका गांधी (कांग्रेस): कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी इस पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या इतने बड़े स्तर का घोटाला सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी मिलकर कर सकते हैं? उन्होंने मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
निष्कर्ष: जहां एक तरफ विपक्षी दल इसे देश के करोड़ों सनातनियों और रामभक्तों के भरोसे के साथ “बड़ा विश्वासघात” बता रहे हैं, वहीं सत्ताधारी दल (भाजपा) का कहना है कि कानून अपना काम निष्पक्षता से कर रहा है और इस संवेदनशील धार्मिक मुद्दे पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। एसआईटी (SIT) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह मामला यूपी सरकार की पारदर्शिता के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

