नई दिल्ली:
भारत की घरेलू खपत (Private Consumption) आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। FICCI और Deloitte की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की निजी खपत लगभग 1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आय, डिजिटल अपनाने की रफ्तार, ई-कॉमर्स का विस्तार और मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति इस वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रिटेल और उपभोक्ता बाजार तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल भुगतान, क्विक कॉमर्स, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग उपभोक्ता व्यवहार को नई दिशा दे रही है। साथ ही, टियर-2 और टियर-3 शहर भी इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवा आबादी, बढ़ता शहरीकरण और तकनीक आधारित खरीदारी का विस्तार भारत को दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में शामिल कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो भारत का उपभोक्ता और रिटेल सेक्टर न केवल आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि रोजगार सृजन, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक उपभोक्ता बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

