विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने अल नीनो (El Niño) के लगातार मजबूत होने को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि प्रशांत महासागर का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है, जिसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखा और असामान्य बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का असर भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है। इससे सामान्य वर्षा का संतुलन बिगड़ने की आशंका है, जिसका सीधा प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
वर्तमान में देश के कुछ हिस्से, जैसे असम और केरल, भारी बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जबकि भविष्य में अन्य क्षेत्रों में जल संकट और तापमान में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव से मौसम का स्वरूप और अधिक अनिश्चित हो सकता है।
WMO और UN ने सभी देशों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाकर ही भविष्य में संभावित जलवायु संकट के असर को कम किया जा सकता है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

