पणजी। गोवा में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की पणजी पीठ ने चुनाव आयोग से कई सवाल किए हैं। अदालत के सामने परेश सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों का मामला आया, जिनके नाम पते में बदलाव के लिए Form 8 जमा करने के बावजूद मतदाता सूची से हट गए।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटने की स्थिति पर चिंता जताई। अदालत ने सवाल किया कि यदि SIR प्रक्रिया के दौरान भारतीय नागरिकों के नाम ही वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएं, तो इस प्रक्रिया का उद्देश्य क्या रह जाता है।
Form 8 भरने के बाद भी हटे नाम
मामला गोवा के सांता क्रूज विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। परेश सालगांवकर और उनके परिवार के सदस्यों ने पता बदलने के लिए Form 8 दाखिल किया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इसके बावजूद SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं दिखाई दिए।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में उनके पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या के कारण Form 8 आवेदन आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद परिवार को दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए Form 6 भरने का विकल्प बताया गया। अदालत ने इस स्थिति पर सवाल उठाया, क्योंकि Form 6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कोर्ट ने पूछा- SIR का मकसद क्या है?
अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ मतदाता सूची से अपात्र लोगों को हटाना ही नहीं, बल्कि पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित होने से बचाना भी है। पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि यदि कोई भारतीय नागरिक तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण वोटर लिस्ट से बाहर हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में उसे अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए क्या प्रभावी रास्ता उपलब्ध है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी मतदाता का किसी विशेष स्थान पर मौजूद न होना ही उसका नाम हटाने का पर्याप्त आधार हो सकता है। कोर्ट के अनुसार, SIR की प्रक्रिया में नागरिकता और मतदाता की पात्रता की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके चलते पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से बाहर नहीं होने चाहिए।
Form 6 को लेकर भी कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई में यह मुद्दा भी उठा कि जिन लोगों के नाम पहले से मतदाता सूची में थे, उन्हें नए मतदाता के तौर पर Form 6 भरने के लिए कहना किस हद तक उचित है। अदालत ने ऐसी स्थिति को मतदाताओं के लिए एक तरह की ‘Catch-22’ स्थिति बताया, जिसमें Form 8 स्वीकार नहीं होने पर Form 6 का रास्ता बताया जा रहा है।
चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि मौजूदा प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर के तहत कुछ परिस्थितियों में Form 8 आवेदन स्वीकार नहीं हो पाता। वहीं अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी व्यवस्था को कानूनी प्रक्रिया पर हावी नहीं होना चाहिए।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर सुनवाई जारी
बॉम्बे हाई कोर्ट की पणजी पीठ ने मामले में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं के नाम हटने से जुड़े सवालों पर सुनवाई जारी रखी है। अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के साथ-साथ पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा भी जरूरी है।
फिलहाल मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है। आगे की सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्था को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी।

