पटना/भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक नया और बड़ा राजनीतिक-सामाजिक मोड़ ले लिया है। विपक्ष और सामाजिक संगठनों के बाद अब देश के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी इस घटना को लेकर बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे लोकतंत्र के लिए एक बेहद चिंताजनक संकेत बताया।
‘जनता की हत्या करना राजा के लिए पाप’
अनिरुद्धाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि राजनेताओं को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वे जनता के वोटों की बदौलत ही सत्ता के शीर्ष पर बैठते हैं। उन्होंने कहा:
उन्होंने आगे जोड़ा कि अगर किसी ने आतंकवाद या कोई गंभीर अपराध किया है, तो कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन अपनी बात रखने वाले किसी आम नागरिक की आवाज को इस तरह दबाना पूरी तरह अनुचित है।
‘अपराधी नहीं, बाढ़ पीड़ितों की आवाज था भरत’
कथावाचक ने स्पष्ट रूप से कहा कि भरत तिवारी ने किसी अपराध को अंजाम देने या दहशत फैलाने के लिए हथियार नहीं उठाया था। वह पिछले दो सालों से अपने गांव बिलौटी (शाहपुर थाना क्षेत्र) के गंगा कटाव और बाढ़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और सरकारी सहायता के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहा था। जब अधिकारियों ने उसकी जायज मांगों को अनसुना कर दिया, तब उसने हताशा में विरोध का रास्ता चुना।
क्या है पूरा विवाद और पुलिस के दावों पर सवाल?
यह पूरा मामला 17 जून को तब शुरू हुआ जब भोजपुर में पुलिस और एसटीएफ की टीम ने भरत भूषण तिवारी की घेराबंदी की। पुलिस मुठभेड़ में घायल भरत की इलाज के दौरान पटना पीएमसीएच (PMCH) में मौत हो गई। इस एनकाउंटर को लेकर पुलिस की थ्योरी पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
- सोशल मीडिया वीडियो: 16 जून को भरत का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। परिवार का आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें डराना-धमकाना शुरू कर दिया।
- आत्मसमर्पण का दावा: सोशल मीडिया पर भरत के आत्मसमर्पण करने के वीडियो सामने आए हैं, लेकिन पुलिस का दावा है कि उसने सरेंडर के बाद दोबारा हथियार उठाने की कोशिश की, जिसके बाद उसके पैरों में गोली मारी गई। हालांकि, दोबारा हथियार उठाने का कोई स्पष्ट वीडियो सामने नहीं आया है।
- देरी और चोटें: परिजनों का आरोप है कि घायल भरत को अस्पताल ले जाने में जानबूझकर देरी की गई। इसके अलावा, डॉक्टरों के अनुसार भरत को पैरों के साथ-साथ पेट के निचले हिस्से में भी गोली लगी थी।
मामले की टाइमलाइन पर एक नज़र
- 15 जून: पुलिस पहली बार भरत तिवारी के घर पहुंची (परिजनों ने धमकी देने का आरोप लगाया)।
- 16 जून: भरत का वीडियो वायरल हुआ; पुलिस दोबारा पहुंची, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
- 17 जून: सुबह पुलिस और एसटीएफ ने घर को घेरा; मुठभेड़ में भरत घायल हुआ और पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई।
- 20 जून: चौतरफा दबाव के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए।
प्रशासन ने मानी चूक, अब जांच पर टिकी निगाहें
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने भी स्वीकार किया है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस की कार्रवाई में लापरवाही हुई थी और स्थिति को समय रहते संभाला जा सकता था।

