लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर में मिले दान को लेकर उठे कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया पहले से जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
सपा सांसद Awadhesh Prasad ने आरोप लगाया कि मंदिर में प्राप्त दान से जुड़े मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। वहीं, महाराष्ट्र सपा अध्यक्ष Abu Azmi ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े धन के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
दान से जुड़े विवाद ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। जानकारी के अनुसार, कुछ याचिकाकर्ताओं ने Supreme Court of India में याचिका दाखिल कर स्वतंत्र जांच की मांग की है। याचिका में कथित वित्तीय लेन-देन और रिकॉर्ड प्रबंधन की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी में विशेष जांच टीम गठित करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही सभी वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है।
सरकार ने दिया जवाब
विपक्ष के आरोपों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) पहले ही गठित किया जा चुका है। राज्य सरकार के मंत्री Om Prakash Rajbhar ने कहा कि जांच निष्पक्ष ढंग से की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बहस के केंद्र में पारदर्शिता का सवाल
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े किसी भी आरोप ने स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों और अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

