कानपुर। लखनऊ में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में कानपुर के सबसे बड़े कोचिंग हब काकादेव में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाते हुए सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक करीब 30 कोचिंग संस्थानों और इमारतों को सील किया जा चुका है, जबकि कई अन्य भवनों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से काकादेव क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की टीम लगातार इलाके में निरीक्षण कर रही है और उन भवनों को चिन्हित किया जा रहा है जहां फायर सेफ्टी, भवन निर्माण और संचालन संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिनमें फायर सेफ्टी एनओसी का अभाव, आपातकालीन निकासी मार्ग न होना, बेसमेंट में कोचिंग संचालन और बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, KDA ने विशेष अभियान के लिए चार अलग-अलग टीमों का गठन किया है। ये टीमें क्षेत्र की प्रत्येक इमारत का निरीक्षण कर रही हैं और भवनों के स्वीकृत मानचित्र, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, पार्किंग व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हजारों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान भी प्रशासन की कार्रवाई की जद में आए हैं। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कई संस्थानों को खाली कराकर सील कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और जिन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
KDA सचिव अभय पांडे ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ की घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर किया है और भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जहां भी मानकों का उल्लंघन मिलेगा, वहां सीलिंग सहित अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर इतने लंबे समय तक नियमों की अनदेखी कर ये संस्थान कैसे संचालित होते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर नियमित निरीक्षण होता रहता, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। हालांकि प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहन समीक्षा कर रहा है और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
काकादेव को उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी कोचिंग मंडियों में गिना जाता है, जहां हर साल हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन की यह सख्ती न केवल छात्रों बल्कि अभिभावकों के लिए भी राहत की खबर मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आने वाले दिनों में और तेज किया जाएगा तथा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी

