इस्लामाबाद / नई दिल्ली:
पाकिस्तान में 1999 के कारगिल युद्ध को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सैन्य गलियारों में गर्माहट आ गई है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने एक सार्वजनिक मंच से अपनी ही देश की सेना पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
- सैनिकों को अपनाने से इनकार: फजलुर रहमान ने दावा किया कि कारगिल युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले पाकिस्तानी सैनिकों को पाक सेना ने अपना मानने तक से इनकार कर दिया था।
- भारतीय सीमा में छोड़े शव: उन्होंने कहा कि युद्ध में मारे गए सैनिकों के शवों को पाकिस्तान की सेना ने लेने से मना कर दिया और उन्हें भारतीय सेना के पास ही लावारिस छोड़ दिया गया था।
- भारत के पक्ष की पुष्टि: मौलाना का यह बयान भारत के उस दशकों पुराने और आधिकारिक रुख पर मुहर लगाता है, जिसमें भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान ने अपने मृत सैनिकों के शव स्वीकार नहीं किए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने ही पूरी सैन्य परंपरा और इस्लामिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया था।
पाक सेना की साख पर उठे सवाल
मौलाना फजलुर रहमान के इस सनसनीखेज दावे के बाद पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और उसके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इस विवादित बयान पर पाकिस्तान सेना या उनके अंतर-सेवा जनसंपर्क (ISPR) की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई है
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi

