लंदन, 22 अगस्त 2026। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ते हालात को लेकर ब्रिटेन के 70 से अधिक सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। सांसदों ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर क्षेत्र में हिंसा रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
हिंसा, गिरफ्तारी और संचार प्रतिबंधों पर जताई चिंता
ब्रिटिश सांसदों ने पत्र में कहा कि पिछले कुछ महीनों में PoK से मौतों और घायलों, संचार प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, जरूरी सामान की आपूर्ति में बाधा और शांतिपूर्ण राजनीतिक एवं नागरिक गतिविधियों पर पाबंदियों की खबरों ने गंभीर चिंता पैदा की है।
सांसदों ने ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरियों की चिंताओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि कई परिवार क्षेत्र में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
UN के मानवाधिकार रुख का किया स्वागत
सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र की ओर से शांति, सार्थक एवं समावेशी राजनीतिक संवाद, इंटरनेट और संचार सुविधाओं की बहाली तथा अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता का सम्मान किए जाने की अपील का स्वागत किया।
उन्होंने अशांति के दौरान हुई मौतों की तत्काल, पूर्ण और निष्पक्ष जांच की जरूरत पर भी जोर दिया।
भोजन और दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग
ब्रिटिश सांसदों ने UN से अपील की कि वह संबंधित संस्थाओं और प्रयासों के माध्यम से हिंसा को रोकने और नागरिकों की जान बचाने के लिए कदम उठाए। साथ ही उन्होंने संचार सुविधाओं की बहाली और सुरक्षा तथा भोजन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद की मांग की।
सांसदों ने मनमानी गिरफ्तारियों को रोकने, उचित कानूनी प्रक्रिया और कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करने तथा स्वतंत्र मानवाधिकार पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में पहुंच देने की मांग भी उठाई।
शांतिपूर्ण समाधान और जवाबदेही पर जोर
सांसदों ने कहा कि लंबे समय तक स्थिरता केवल पाबंदियों या टकराव से हासिल नहीं की जा सकती। इसके लिए सार्थक बातचीत जरूरी है, जिसमें कश्मीरियों के अधिकारों और उनकी चिंताओं को सुना और सम्मानित किया जाए।
PoK में हिंसा को लेकर ब्रिटिश सांसदों की यह अपील ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में तनाव और मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बनी हुई है। ब्रिटेन की संसद में भी इस मुद्दे पर पहले चिंता जताई जा चुकी है।

