वाराणसी (काशी)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण (Model Railway Station Project) को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार (सर्कुलेटिंग एरिया) के पास स्थित ऐतिहासिक ‘मस्जिद गंज शहीदा’ के परिसर पर एक बेदखली नोटिस चस्पा किया है। इस नोटिस के माध्यम से मस्जिद प्रबंधन को आगामी 20 जून 2026 तक परिसर को पूरी तरह से खाली करने और निर्माण हटाने का कड़ा ‘अल्टीमेटम’ दिया गया है।
क्या है पूरा मामला और अदालती आदेश?
रेलवे प्रशासन द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, यह कार्रवाई एक लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद के निपटारे के बाद की जा रही है। इस मामले में मूल वाद संख्या 1174/1991 (अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) वाराणसी की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित था।
रेलवे प्रशासन का पक्ष
स्टेशन अधीक्षक और रेलवे अधिकारियों के अनुसार, काशी रेलवे स्टेशन को एक अत्याधुनिक ‘मॉडल स्टेशन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्टेशन के विस्तार और सुंदरीकरण के लिए इस मुख्य प्रवेश द्वार के पास की जमीन का खाली होना अनिवार्य है। प्रशासन का कहना है:
- वैधानिक प्रक्रिया: यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
- स्वैच्छिक निकासी की अपील: संबंधित पक्ष से अनुरोध किया गया है कि वे 20 जून तक स्वयं संरचना को हटा लें।
- अंतिम चेतावनी: यदि तय समय सीमा के भीतर परिसर खाली नहीं किया गया, तो रेलवे प्रशासन सुरक्षा बलों की मदद से किसी भी दिन ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई अमल में ला सकता है।
मस्जिद इंतजामिया कमेटी की प्रतिक्रिया
इस मस्जिद का प्रबंधन अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी करती है (जो ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख भी संभालती है)। कमेटी ने रेलवे के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है और रेलवे की नोटिस के जवाब में पलटवार करते हुए इसे भ्रामक करार दिया है। इंतजामिया कमेटी और स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह मस्जिद सदियों पुरानी (लगभग 992 वर्ष प्राचीन) है, जबकि इस क्षेत्र में रेलवे का आगमन बहुत बाद में (1887 के आसपास) हुआ था।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि काशी स्टेशन विकास परियोजना के तहत यह पहला कदम नहीं है। इससे पहले 3 जून को भी भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इसी तरह की एक अदालती कार्रवाई के तहत स्टेशन परिसर के पास स्थित ‘अजगैब शहीद मजार’ और एक अन्य मस्जिद संरचना को हटाया गया था।
20 जून की समय-सीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वाराणसी प्रशासन और पुलिस बल पूरे इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।