दरअसल, कुछ दिनों पहले उद्धव ठाकरे गुट के कद्दावर नेता संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि उनकी पार्टी के सांसदों और विधायकों को तोड़ने के लिए विपक्ष द्वारा 50-50 करोड़ रुपये के बंपर ऑफर दिए जा रहे हैं। राउत के इस बयान के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई थी और पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं।
‘राउत की बातों का कोई वजूद नहीं’ — निलेश राणे का तीखा पलटवार
संजय राउत के इन आरोपों पर निलेश राणे ने बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब दिया है। राणे ने कहा:
- सुर्खियां बटोरने का स्टंट: संजय राउत के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे रोज सुबह उठकर सिर्फ मीडिया में बने रहने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत और आधारहीन आरोप लगाते हैं।
- विश्वसनीयता शून्य: निलेश राणे ने राउत को ‘गटर छाप’ बताते हुए कहा कि उनकी बातों को राज्य की जनता अब गंभीरता से नहीं लेती। उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
परदे के पीछे का असली खेल: क्या सच में होने वाली है टूट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी सिर्फ एक सतही लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे महाराष्ट्र की राजनीति में होने वाली बड़ी हलचल छिपी है:
- संगठन को बचाने की छटपटाहट: सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के भीतर कुछ नेताओं के पाला बदलने की अटकलें तेज हैं। ऐसे में राउत का यह बयान अपने विधायकों और सांसदों पर नैतिक दबाव बनाने और उन्हें एकजुट रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
- आगामी चुनावों की बिसात: महाराष्ट्र में होने वाले आगामी चुनावों को देखते हुए सभी दल अपने कुनबे को बचाने और सामने वाले को कमजोर दिखाने की पूरी कोशिश में जुटे हैं।