नई दिल्ली/इस्लामाबाद:
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की चौतरफा निंदा शुरू हो गई है। वैश्विक मानवाधिकार संस्था इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) ने PoK में जारी क्रैकडाउन पर गहरी चिंता जताते हुए पाकिस्तान सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
8 दिनों में 32 से अधिक नागरिकों की मौत, संचार सेवाएं ठप
IHRF द्वारा जारी दावों के मुताबिक, 8 जून से 16 जून 2026 के बीच पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा की गई दमनकारी कार्रवाई में 32 से ज्यादा आम नागरिकों की जान जा चुकी है। प्रदर्शनों को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं और पूरे क्षेत्र में संचार सेवाओं (इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क) को पूरी तरह ठप कर दिया गया है, ताकि जमीनी हकीकत बाहर न आ सके।
IHRF ने की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान सरकार के इस कृत्य को नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया है। IHRF ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच: PoK में सुरक्षा बलों द्वारा की गई हिंसा और मौतों की एक अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र टीम से जांच कराई जाए।
- बंदियों की रिहाई: शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अवैध रूप से गिरफ्तार किए गए सभी नागरिकों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए।
- नागरिक अधिकारों की बहाली: क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं और लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने की आजादी दी जाए।
(क्यों सुलग रहा है PoK?)
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से PoK में महंगाई, आटे की किल्लत, भारी टैक्स और बिजली के आसमान छूते बिलों के खिलाफ स्थानीय जनता सड़कों पर है। जब लोगों ने अपने हक के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया, तो पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बातचीत के बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुना, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
अब वैश्विक स्तर पर उठ रही इस आवाज ने पाकिस्तान सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, और आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की फजीहत होना तय माना जा रहा है।

