नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा नहीं होने को लेकर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संसद केवल सरकार की घोषणाओं का “नोटिस बोर्ड” बनकर नहीं रह सकती, बल्कि यह देश के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर और सार्थक बहस का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच होना चाहिए।
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान थरूर ने कहा कि विपक्ष लगातार ऐसे मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है जो सीधे देश और जनता से जुड़े हैं। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए और संसद में खुली चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर देना चाहिए।
थरूर ने आरोप लगाया कि यदि संसद में केवल सरकारी घोषणाएं और विधेयक पेश किए जाएं तथा विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर न मिले, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि संसद का उद्देश्य केवल सरकारी एजेंडे को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि विभिन्न विचारों और मतों पर व्यापक चर्चा कर समाधान निकालना भी है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश के सामने मौजूद कई महत्वपूर्ण और “ज्वलंत” मुद्दों पर संसद में चर्चा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे विषयों पर भी सदन में विस्तृत बहस कराई जाए, ताकि जनता से जुड़े सवालों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जा सके।
थरूर के इस बयान को संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।
मुख्य स्रोत: एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI)

