मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में आज का दिन बेहद हलचल भरा रहा। शिव सेना के स्थापना दिवस के मौके पर मुंबई के बांद्रा, कलानगर और मातोश्री जैसे प्रमुख इलाकों में दोनों गुटों—एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना (UBT)—के पोस्टरों और बैनरों की होड़ देखने को मिली। 2022 में पार्टी में हुए विभाजन के बाद से शुरू हुई यह राजनीतिक जंग आज एक बार फिर सड़कों पर खुलकर सामने आई।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’?
इस साल के स्थापना दिवस समारोह के बीच ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें काफी तेज हैं।
- दावा: शिव सेना के विधान परिषद सदस्य (MLC) चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और उन्होंने शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
- सच्चाई: हालांकि इस दावे को लेकर अभी तक संबंधित सांसदों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर, शिव सेना ने स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान इन खबरों का खंडन भी किया है कि ये सांसद पार्टी में शामिल हो रहे हैं।
पृष्ठभूमि: 2022 का वो ऐतिहासिक विभाजन
यह पूरी सियासी जंग साल 2022 में शुरू हुई थी जब एकनाथ शिंदे ने भारी संख्या में विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी। लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बाद:
- चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के गुट को असली ‘शिव सेना’ के रूप में मान्यता दी।
- शिंदे गुट को पार्टी का पारंपरिक ‘तीर-कमान’ चुनाव चिह्न सौंप दिया गया।
- उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े को शिव सेना (UBT) नाम मिला।
आज स्थापना दिवस के बहाने दोनों ही धड़े खुद को बालासाहेब ठाकरे की विरासत का असली हकदार साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ का यह ऊंट किस करवट बैठता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।